Class 12 Political Science Notes Chapter 1

शीत युद्ध से अभिप्राय विश्व की दो महाशक्तियों अमरीका व भूतपूर्व सोवियत संघ के बीच व्याप्त उन कटु संवधों के इतिहास से है जो तनाव, भय ईष्र्या पर आधारित था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1945-1991 के मध्य इन दोनों महाशक्तियों के बीच शीत युद्ध का दौर चला और विश्व दो गुटों में बँट गया। यह दोनों के मध्य विचारात्मक तथा राजनै. तिक संघर्ष था।

* स्मरणीय बिन्दु :- द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से अब तक की

प्रथम विश्व युद्ध – 1914 से 1918 तक
द्वितीय विश्व युद्ध – 1939 से 1945 तक

• द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक की वैश्विक घटनाओं का अध्ययन समकलीन विश्व राजनीति के विषय है।

* द्वितीय विश्व युद्ध के गुट

1) मित्र राष्ट्र सोवियत संघ, फ्रांस, ब्रिटेन संयुक्त राज्य अमेरिका

2) धुरी राष्ट्र जर्मनी, जापान, इटली।

* द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के पश्चात दो महाशक्तियों का उदय हुआ :- पूंजीवादी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका और समाजवादी विचारधारा के सोवियत संघ का।

* अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए दोनों ही महाशक्तियों ने अन्य देशों के साथ संधियाँ की।

* सैन्य संधि संगठन

• अमरीका

1. NATO – (1949) North Atlantic treaty organization
2. SEATO – (1954) South East Asian Treaty organization

• सोवियत संघ
वारसा पैक्ट 1955

3. CENTO (1955) Central Treaty organization

• अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाते हुए तथा उनसे प्राप्त अन्य लाभों को देखते हुए महाशक्तियाँ छोटे देशों को साथ रखना चाहती थी।
• छोटे देश भी सुरक्षा, हथियार और आर्थिक मदद की दृष्टि से महाशक्तियों से जुड़े रहना चाहते थे।
• परमाणु सम्पन्न होने के कारण दोनों ही महाशक्तियों में रक्त रंजित युद्ध के स्थान पर प्रतिद्धन्दिता तथा तनाव की स्थिति बनी रही। जिसे शीत युद्ध कहा गया।

* महाशक्तियों को छोटे देशों से लाभ :-

1) छोटे देशों के प्राकृतिक संसाधन प्राप्त करना।
2) सैन्य ठिकाने स्थापित करना।
3) आर्थिक सहायता प्राप्त करना।
4) भू-क्षेत्र (ताकि महाशक्तियाँ अपने हथियारों और सेना का संचालन कर सके।

* शीतयुद्ध के दायरे :-

1) 1948 में बर्लिन की नाकेबंदी
2) 1950 में कोरिया संकट
3) 1954-1975 तक वियतनाम में अमेरिकी हस्तक्षेप
4) 1956 हंगरी में सोवियत संघ का हस्तक्षेप
5) 1962 क्यूबा मिसाइल संकट

* दो ध्रुवीयता को चुनौती :- गुट निरपेक्ष आंदोलन एशिया और अफ्रीका के नव स्वतंत्र राष्ट्रों के समक्ष अपनी स्वतंत्रता एवम् प्रभुसत्ता को बनाए रखने का तीसरा विकल्प था गुट निरपेक्ष आंदोलन में शामिल हो जाना।

* गुट निरपेक्ष आन्दोलन का पहला सम्मेलन 1961 में बेलग्रेड (यूगोस्लाविया की राजधानी) में हुआ। जिसकी नींव 1955 में एफ्रो एशियाई सम्मेलन में रखी गई (बाग सम्मेलन) इस आन्दोलन के संस्थापक देश व नेता थे

• संस्थापक नेता • संस्थापक देश

1. पं. जवाहर लाल नेहरू भारत मिस्त्र
2. कर्नल नासिर. इन्डोनेशिया
3. डा. सुकर्णो यूगोस्लाविया
4. मार्शल टीटो घाना

* 17 वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन का आयोजन वेनेजुएला के “भागारिता द्वीप में सितम्बर, 2016 को किया गया। वर्तमान में इस आंदोलन के सदस्यों की संख्या 120 है। साथ ही साथ वर्तमान से इसके 17 देश तथा 10 अंतर्राष्ट्रीय संगठन पर्यवेक्षक है इस शिखर सम्मेलन में आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र सुधार, पश्चिम एशिया की स्थिति, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों, जलवायु परिर्वतन, सतत विकास शरणार्थी समस्या और परमाणु निशस्त्रीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। 18वा NAM सम्मेलन का आयोजन अजरबेजान में 2019 में होना तय हुआ है।

* नव अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (N.I.E.O) 1972 में UNO के व्यापार एवम् विकास आंदोलन (UNCTAD) में विकास के लिए एक नई व्यापार नीति का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया ताकि धनी देशों द्वारा नव स्वतन्त्र गरीब देशों का शोषण न हो सके।
दुवाईस अ न्यू ट्रेड पॉलिसी फॉर डेवलेपमेंट (विकास के लिए नई व्यापारिक नीति की ओर) एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

* भारत और शीतयुद्ध :- शीतयुद्ध के दौरान भारत ने नव स्वतंत्र देशों का नेतृत्व किया तथा अपने राष्ट्रीय हितों को पूरा किया। और दोनों महाशक्तियों के मतभेदों को भी दूर करने का प्रयास किया।

* शस्त्र नियंत्रण संधियाँ :-

1. TB.T. सीमित परमाणु परीक्षण संधि – 5 अगस्त 1963

2. SALT सामारिक अस्त्र परिसीमन वार्ता – 1) 26 मई 1972, 2) 18 जून 1972

3. START – सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि – 1) 31 जुलाई 1991, 2)3 जनवरी 1993

4. N.P.T. परमाणु अप्रसार संधि 1 जुलाई 1968
(पांच परमाणु सम्पन्न देश फ्रांस, जर्मनी, अमरीका, ब्रिटेन, रूस ( पूर्व सोवियत संघ) ही परमाणु परीक्षण कर सकते थे अन्य देश नहीं।)

शीतयुद्ध का अर्थ होता है जब दो या दो से अधिक देश के बीच ऐसी स्थिति बन जाए कि लगे युद्ध होकर रहेगा परंतु वास्तव में कोई युद्ध ना हो। इसमें युद्ध की पूरी संभावना रहती है युद्ध की आशंका, डर, तनाव, संघर्ष जारी रहता है लेकिन युद्ध नहीं होता
ऐसा अमेरिका तथा सोवियत संघ के बीच में हुआ
शीत युद्ध ( 1945-1991 ) तक हुआ |

प्रसन 1. शीत युद्ध में विचारधाराओं की लड़ाई से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:- अमेरिका और सोवियत संघ के बीच विचारधाराओं की लड़ाई से तात्पर्य है की- दुनिया में आर्थिक,सामाजिक, जीवन को सूत्र बन्द करने का सबसे अच्छा सिद्धांत कौन सा है |

(अमेरिका) = ऐसा मानता था कि पूंजीवादी व्यवस्था दुनिया में बेहतर है

{सोवियत संघ} =मानता था कि समाजवादी, साम्यवादी अर्थव्यवस्था बेहतर है

{पूंजीवाद} = सरकार का हस्तक्षेप कम होता है, व्यापार अधिक होता है, निजी व्यवस्था

{साम्यवाद} = सारी व्यवस्था सरकार के हाथ में, निजी व्यवस्था का विरोध होता है

प्रसन 2. शीत युद्ध का कारण?

उत्तर :- दोनों महाशक्तियों दूसरे विश्वयुद्ध के बाद एक दूसरे के सामने खड़ी हो गई। उसके बीच हथियारों की होड़ शुरू हो गई यही घटना शीत युद्ध का कारण बनी

प्रसन 3. प्रथम तथा द्वितीय विश्व युद्ध कब हुआ?

उत्तर :- प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक हुआ।
द्वितीय विश्व युद्ध 1939 से 1945 तक हुआ।

प्रसन 4. अमेरिका ने जापान पर परमाणु बम क्यों गिराया था?

उत्तर:- अमेरिका ने अगस्त 1945 में जापान के शहर हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरा।

अमेरिका के गिराए गए परमाणु बमों के नाम

1) लिटिल बॉय

2) फैट मैन
बमो की क्षमता= 15 से 21 किलो टन थी

{अमेरिका की आलोचना} = जापान आत्मसमर्पण करने वाला था तो बम गिराने की कोई जरूरत नहीं थी
{अमेरिका ने अपने पक्ष में कहा} = हम चाहते थे कि द्वितीय विश्वयुद्ध जल्दी खत्म हो जाए और आगे का नुकसान ना हो
{हमले के पीछे उद्देश्य} = अमेरिका सोवियत संघ को दिखाना चाहता था कि अमेरिका ही महाशक्तिशाली है

प्रसन 5. क्यूबा मिसाइल संकट

उत्तर :- * क्यूबा एक छोटा सा द्वीपीय देश है जो कि अमेरिका की तट से लगा है और फिदेल कास्त्रो यहां के नेता थे
* यह अमेरिका के पास था लेकिन यह सोवियत संघ के साथ जुड़ा हुआ था और सोवियत संघ क्यूबा को सलाह, हथियार तथा पैसे देता था
* सोवियत संघ के नेता निकिता खुश्चेव ने यह तय किया कि क्यूबा को रूस के सैनिक अड्डे के रूप में बदल दे और 1962 मैं ऐसा कर दिया गया।
अब सोवियत संघ अमेरिका के ऊपर पास से हमला कर सकता था और अमेरिका को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता था
* अमेरिका को इस बात का पता 3 हफ्ते के बाद पता लगी जॉन एफ केनेडी ऐसा कुछ करने से डर रहे थे कि कहीं दोनों के बीच युद्ध शुरू ना हो जाए
क्यूबा मिसाइल संकट को शीत युद्ध का चरम बिंदु कहा जाता है।

प्रसन 6. छोटे देशों का महाशक्तियों में जुड़ने से क्या लाभ था

उत्तर :- 1) सुरक्षा का फायदा 2)हथियार मिलना 3)आर्थिक मदद

प्रसन 7. महाशक्तियां क्यों छोटे-छोटे देशों को अपने में शामिल करती थी

उत्तर :- 1)जरुरत की चीज= जैसे खनिज, तेल, पेट्रोलियम,
2)सैनिक ठिकाने= जासूसी कर सके 3)आर्थिक मदद= छोटे-छोटे देशों की सेना को पैसे देना

प्रसन 8. शीत युद्ध के दायरे?

उत्तर :- *विरोधी खेमों में बैठे देशों के बीच संकट के अवसर आए
* युद्ध हुए| संभावना रही मगर कोई बड़ा युद्ध नहीं हुआ।
* कोरिया वियतनाम और अफगानिस्तान {जबहानि हुए}

प्रसन 9. दो ध्रुवीयता का आरंभ।

उत्तर :- दूसरे विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद अमेरिका तथा सोवियत संघ को दो गुटों में बांट दिया गया विश्व दो ध्रुवे में बट गया, यही दो ध्रुवीय विश्व है
* बंटवारा सबसे पहले यूरोप महाद्वीप से शुरू हुआ
पूर्वी यूरोप = सोवियत संघ {दूसरी दुनिया} पश्चिमी यूरोप =अमेरिका {पहली दुनिया}

प्रसन 10. अमेरिका संगठन नाटो के बारे में लिखें?

उत्तर :- उत्तरी अटलांटिक साधि संगठन स्थापना = अप्रैल 1949
सदस्य = 12
उदय = सभी 12 सदस्य मिलकर रहेंगे अगर किसी एक पर हमला होगा तो हम उसको अपने ऊपर हमला मानेंगे और मिलकर उस का मुकाबला करेंगे

प्रसन 11. सोवियत संघ का संगठन “वारसा संधि”

उत्तर :- यह संगठन सोवियत संघ ने 1955 में बनाया इसका उद्देश्य था नाटो का मुकाबला करना था

प्रसन 12. = गुटनिरपेक्षता का क्या अर्थ है?

उत्तर :- दुनिया शीत युद्ध के दायरे में दो गुटों में बट चुकी थी ऐसे में दो ध्रुवीयता को चुनौती देते हुए गुटनिरपेक्षता (NAM) सामने आया ।
गुटनिरपेक्षता = का अर्थ होता है दोनों ही गुटों में शामिल ना होना

प्रसन 13. गुटनिरपेक्षता आंदोलन के संस्थापक नेताओं के नाम बताऔ?

उत्तर :- यूगोस्लाविया = जोसेफ बाज टीटो
भारत= पंडित जवाहरलाल नेहरू
मिस = गमाल अब्दुल नासिर
घाना = वामे एनकुमा
इंडोनेशिया= शुकंणौ

प्रसन 14. प्रथम गुटनिरपेक्ष सम्मेलन कब और कहां हुआ ?

उत्तर :- 1) 1961 बेलग्रेड 25 देश थे
2) 2006 क्यूबा (हवाना) 116 सदस्य देश तथा 15 पर्यवेक्षक

प्रसन 15. * गुटनिरपेक्ष ना तो पृथकवद है और ना ही तथास्तया समझाओ?

उत्तर :- पृथकवाद का अर्थ होता है अपने आप को अंतरराष्ट्रीय मामलों से काट के रखना । अर्थात बस अपने आप से मतलब रखना बाकी किसी दूसरे से अलग रहना। ऐसा अमेरिका ने किया (1789-1914) तक पृथकवद को अपना के रखा
* भारत ने ऐसा नहीं किया था गुटनिरपेक्षता को अपनाया लेकिन पृथकवाद की नीति नहीं अपनायी।
* भारत आवश्यकता पड़ने पर मदद लेता था और दूसरों की मदद करता था

तथास्तया= गुटनिरपेक्षता का अर्थ तथास्तया का धर्म निभाना नहीं है तथास्तया को अपनाने का मतलब है मुख्यता: युद्ध में शामिल नहीं होना लेकिन यह जरूरी नहीं है कि वह युद्ध को समाप्त करने में मदद कर दें और यह देश युद्ध को सही गलत होने पर कोई पक्ष भी नहीं रखते
* गुटनिरपेक्ष देशों ने तथास्तया को बिल्कुल भी नहीं अपनाया क्योंकि भारत तथा अन्य देशों ने हमेशा से दोनों महाशक्तियों के बीच शत्रुता को कम करने का प्रयास किया है।

प्रसन 16. गुटनिरपेक्षता को अपनाकर भारत को क्या लाभ हुआ?

उत्तर :- 1) अंतरराष्ट्रीय फैसले स्वतंत्र रूप से ले पाया ऐसे फैसले जिसमें भारत को लाभ होना ना कि किसी महाशक्ति को।
2) गुटनिरपेक्षता से भारत हमेशा ऐसी स्थिति में रहा कि अगर कोई एक महाशक्ति उसके खिलाफ जाए तो वह दूसरे की तरफ जा सकता था ऐसे में कोई भी भारत को लेकर ना तो बेफिक्र रह सकता था ना दबाव बना सकता था।

प्रसन 17. भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति की आलोचना हुई? समझाओ

उत्तर :- 1) आलोचकों ने कहा गुटनिरपेक्षता की नीति सिद्धांत विहीन है भारत इसकी आड़ में अंतरराष्ट्रीय फैसले लेने से बचता है
2) भारत के व्यवहार में स्थिरग नहीं है भारत में (1971) की युद्ध में सोवियत संघ से मदद ली थी कुछ नहीं तो यह मान लिया कि हम सोवियत खेमे में शामिल हो गया है।
जब कि हमने सिर्फ मदद ली थी सोवियत संघ हमारा सच्चा दोस्त था उसने हमेशा हमारी मदद की है।

प्रसन 18. नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था से आप क्या समझते हैं।

उत्तर :- * गुटनिरपेक्ष आंदोलन में शामिल अधिकतर देश की अल्पविकसित देशों का दर्जा मिला था यह देश गरीब देश थे इनके सामने मुख्य चुनौती अपनी जनता को गरीबी से निकालना था
* इनके लिए आर्थिक विकास जरूरी था क्योंकि बिना विकास के कोई देश सही मायने में आजाद नहीं रह सकता
* ऐसे में देश उपनिवेश (गुलाम) भी हो सकते हैं इसी समझ से नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की धारणा का जन्म हुआ
* 1972 में (U.N.O) के व्यापार और विकास में संबंधित सम्मेलन (UNCTAD) मैं नाम से एक रिपोर्ट आई।
* इस रिपोर्ट में वैश्विक- व्यापार प्रणाली से सुधार का प्रस्ताव किया गया
इस रिपोर्ट में कहा गया
1)अल्पविकसित देशों का अपने प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार होगा यह देश अपने इन संसाधनों का इस्तेमाल अपने तरीके से कर सकते हैं

2)अल्पविकसित देशों की पहुंच पश्चिमी देशों के बाजार तक होगी यह देश अपना समान पश्चिमी देश तक बेच सकेंगे
3) पश्चिमी देश में मंगायी या जारी टेक्नोलॉजी प्रद्योगिकी की लागत कम होगी
4) अल्प विकसित देशों की भूमिका अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संस्थानों में उनकी भूमिका बढ़ाई जाएगी

प्रसन 19. गुटनिरपेक्षता की प्रकृति धीरे-धीरे बदला है? कैसे?

उत्तर :- जब यह आंदोलन आया था तब इनका काम अपने आप को महाशक्तियों के खेमे से बचाना था ।
लेकिन बाद में इन की प्रकृति बदली अब आर्थिक विकास का मुद्दा ज्यादा प्रबल हो गया था।

प्रसन 20. SEATO, CENTO के बारे में बताओ?

उत्तर :- अमेरिका ने पूर्वी और दक्षिणी पूर्वी एशिया तथा पश्चिमी एशिया में गठबंधन का तरीका अपनाया इन्हीं गठबंधनों को SEATO, CENTO कहा गया है
SEATO= दक्षिणी पूर्वी एशियाई सधि संगठन
CENTO= केंद्रीय संधि संगठन

इसके बाद सोवियत संघ ने चीन, उत्तरी कोरिया, वियतनाम, इराक से संबंध मजबूत किया

एक अंकीय प्रश्न :-
1. वाक्य को सही करके लिखें – अमेरिका ने पूँजीवादी देशों को लेकर 1949 में वारसा संधि की।

उत्तर :- नाटो संधि की।

2, N.P.T. व NATO का शब्द विस्तार लिखे।

उत्तर :- (A) NATO उत्तर अटलांटिक संधि संगठन
(B) NPT परमाणु अप्रसार संधि

3. किन्हीं दो धुरी देशों के नाम बताएँ।

उत्तर :- जर्मनी, इटली, जापान

4. ऐसे दो मित्र देशों के नाम बताएं बाद में जिनके मध्य शीतयुद्ध हुआ।

उत्तर :- सोवियत संघ जर्मनी इटली, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका

5. अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान के किन दो शहरों पर परमाणु बम गिराए थे?

उत्तर :- हिरोशिमा, नागासाकी

6. परमाणु बमों के गुप्त नाम क्या थे?

उत्तर :- लिटिल ब्वॉय, फैटमैन

7. SALT का पूर्ण रूप लिखों।

उत्तर :- सामरिक अस्त्र परिसीमत वार्ता

8. START का पूर्ण रूप लिखे।

उत्तर :- START – सामरिक अस्त्रा न्यूनीकरण संधि ।

9. UNCTAD का विस्तृत रूप लिखे।

उत्तर :- UNCTAD संयुक्त राष्ट्र संघ व्यापार और विकास सम्मेलन ।

10. गुट निरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक किन्ही दो देशों एवं उनके नेताओं के नाम लिखें।

उत्तर :- भारत – जवाहर लाल नेहरू
इण्डोनेशिया – सुकर्णो

11. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
क्यूबा का मिसाइल संकट………. द्वारा क्यूबा में……..को तैनात करने का कारण था।

उत्तर :- सोवियत संघ परमाणु मिसाइलें

12. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।

………. में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन की स्थापना हुई जिसमें… …देश शामिल थे।

उत्तर :- 1949, 12

13. प्रथम गुट निरपेक्ष सम्मेलन में कितने देश शामिल हुये ?

क) 15,
ख) 20,
ग) 30
घ) 25

उत्तर :- 25

14. अमरीका में स्वतंत्रता की लड़ाई कब हुई थी?

उत्तर :- 1787

15. गुट निरपेक्ष आंदोलन में शामिल युगोस्लाविया के नेता का नाम लिखें ?

उत्तर :- जोसेफ ब्रॉज टीटो

16. तीसरी दुनिया से क्या अभिप्राय है?

उत्तर :- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अफ्रीका व एशिया के नव स्वतंत्र देश, जिसका विकास कम हुआ है या हो रहा है । (विकासशील)

17. निम्नलिखित घटनाओं को क्रमानुसार लिखें।

i) नाटो की स्थापना
ii) प्रथम विश्वयुद्ध
iii) हिरोशिमा व नागासाकी पर परमाणु बम गिराना iv) वारसा संधि

उत्तर :- 1 ii
2. iii
3. i
4. iv

18. शीतयुद्ध के युग में एक पूर्वी तथा एक पश्चिमी गठबंधन का नाम लिखें।

उत्तर :- पूर्वी गठबंधन- वारसा संधि, पश्चिमी गठबंधन-SEATO

19. क्युबा मिसाइल संकट के दौरान सोवियत संघ के नेता कौन थे ?

उत्तर :- निकिता खुश्चेव

20. प्रथम विश्वयुद्ध कब से कब तक हुआ ?

उत्तर :- 1914-1918

1. शीत युद्ध से क्या तात्पर्य है?

उत्तर :- शीतयुद्ध से अभिप्राय है कि परमाणु महाशक्ति होने के कारण दोनों ही महाशक्तियों (USA, USSR) में सीधे रक्त रंजित युद्ध के स्थान पर प्रतिद्व पिता तथा तनाव की स्थिति बनी रही।

2. गुट निरपेक्षता से क्या अभिप्राय है?

उत्तर :- दोनों महाशक्तियों में से किसी के भी गुट में शामिल न होने की नीति ही गुट निरपेक्षता है।

3. नव अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का प्रमुख लक्ष्य क्या था ?

उत्तर :- अल्पविकसित देशों का अपने संसाधनों पर नियंत्रण होगा तथा पश्चिमी देशों के बाजारों तक उनकी पहुँच होगी।

4. भारत सीटो तथा नाटो का सदस्य क्यों नहीं बना?

उत्तर :- भारत किसी भी महाशक्ति के गुट का सदस्य नहीं बनना चाहता था। स्वतंत्र नीति बनाए रखने के कारण भारत सीटो, नाटो जैसी सैनिक संधियों में शामिल नहीं होना चाहता।

5. अस्त्र नियंत्रण हेतु महाशक्तियों ने किन दो संधियों पर हस्ताक्षर किए?

उत्तर :- L.T.B.T., SALT, START.

6. अपरोध किसे कहते है ?

उत्तर :- अपरोध अर्थात् रोक और संतुलन। जब दोनों पक्ष विनाश करने में समर्थ हो तो कोई भी पक्ष युद्ध का खतरा नहीं उठाना चाहता।

7. क्युबा मिसाइल संकट के समय USA तथा USSR का नेतृत्व कौन कर रहा था ?

उत्तर :- U.S.A. जॉन एफ केनेडी U.S.S.R. निकिता खुश्चेव।

1. महाशक्तियाँ छोटे देशों को अपने साथ क्यों रखती थीं ? (Imp.)

उत्तर :-

2. क्यूबा मिसाइल संकट शीतयुद्ध का चरम बिन्दु था’ स्पष्ट करें? (Imp.)

उत्तर :- 1962 में सोवियत संघ ने क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात कर दी और अमेरिका निशाने की सीमा में आ गया। पर अमेरिकी राष्ट्रपति कैनेडी की जबावी कार्यवाही के बाद सोवियत संघ ने मिसाइलें हटा ली। दोनों महाशक्तियों के मध्य तनाव और प्रतिद्वदिता ने युद्ध का रूप नहीं लिया। क्यूबा मिसाइल संकट शीतयुद्ध का चरम बिंदु कहलाता है।

3. गुट निरपेक्षता की नीति के चार सिद्धांत लिखे।

उत्तर :- (i) स्वतंत्र विदेश नीति
(ii) महाशक्तियों के गुटो से अलग रहना
(iii) साम्राज्यवाद का विरोध करना।
(iv) विश्व शांति व सह अस्तित्व
(v) रंगभेद का विरोध करना।
(vi) आपसी विवादों को बातचीत से सुलझाना।
(vii) U.N.O. में विश्वास।

4. नव अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था क्या है? इसकी दो विशेषताएँ बतायें।

उत्तर :- अल्पविकसित देशो द्वारा अपना आर्थिक तथा टिकाऊ विकास करना। इनकी दो विशेषताएँ निम्न हैं :-

(i) अल्प विकसित देशों का अपने प्राकृतिक साधनों पर नियंत्रण हो।
(ii) अल्प विकसित देशों की अन्तराष्ट्रीय आर्थिक संगठनों में भूमिका बढ़े।

5. “गुटनिरपेक्षता का अर्थ तटस्थता का धर्म निभाना नहीं है।” उपरोक्त वाक्य को स्पष्ट करें।

उत्तर :- “गुट निरपेक्षता का अर्थ तटस्थता का धर्म निभाना नहीं है।” उक्त कथन से तात्पर्य है कि मुख्यतः युद्ध में शामिल न होने की नीति का पालन करना। तटस्थता की नीति का पालन करने वाले देश के लिए यह जरूरी नहीं कि वह युद्ध को समाप्त करने में मदद करे ऐसे देश युद्ध में संलग्न नहीं होते और न ही युद्ध के सही-गलत होने के बारे में उनका कोई पक्ष होता है। दरअसल कई कारणों से गुटनिरपेक्ष देश, जिसमें भारत भी शामिल है, युद्ध में शामिल हुए हैं। इन देशों ने दूसरे देशों के बीच युद्ध को होन से टालने के लिए काम किया है और हो रहे युद्ध के अंत लिए प्रयास किए हैं।

पाँच अंक के प्रश्न :- निम्न अवतरण को पढ़े तथा उत्तर दे :-

1. शीतयुद्ध सिर्फ जोर-आजमाइश, सैनिक गठबंधन तथा शक्ति संतुलन का मामला भर नहीं था बल्कि इसके साथ साथ विचारधारा के स्तर पर भी वास्तविक संघर्ष जारी था।

(i) शीतयुद्ध जिन दो महाशक्तियों के बीच था, उनके नाम लिखें।

(ii) दोनों महाशक्तियों द्वारा बनाये गये सैन्य गठबंधनों में से एक-एक का नाम लिखें।

(iii) उपरोक्त गद्यांश में किन विचारधाराओं के मध्य संघर्ष की बात की जा रही है? किस विचारधारा वाले देश का विघटन हो गया ?

उत्तर :- 1. अमरीका व सोवियत संघ

2. NATO व वारसा संधि।

3, पूँजीवादी विचारधारा व साम्यवादी विचारधारा।

छ: अंकीय प्रश्न :-
1. द्विध्रुवीय विश्व के उदय के क्या कारण थे ? दोनों शक्ति गुटों के बीच शीतयुद्ध सम्बंधी दायरे कौन-कौन से थे ?

उत्तर :- दोनों महाशक्तियाँ विश्व में अपना प्रभाव, वर्चस्व बढ़ाना चाहती थी। अपनी सैन्य शक्ति, परमाणु ताकत, वैचारिक धारणा को बढ़-चढ़ कर दिखाना चाहती थी।
शीत युद्ध के दायरे के लिए स्मरणीय बिन्दु देखें।

2. शीतयुद्ध काल में दोनों महाशक्तियों ने एक तरफ तो हथियारों की होड़ की तथा दूसरी ओर हथियार सीमित करने के लिए संधिया की। क्यों ?

उत्तर :- हथियारों की होड़ :-

(1) अपना वर्चस्व स्थापित करना।

(ii) अति उत्तम तकनीक के हथियार बनाना।

(iii) ज्यादा ताकत के परमाणु बम बनाना।

नियंत्रण :-
(1) दोनों को ही अपने नष्ट होने का भय।
(2) हथियार निर्माण के धन को बचाना।
(3) शस्त्र परिसीमन संधियों की।

3. शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद क्या गुट निरपेक्षता की नीति प्रासंगिक अथवा उपयोगी है? स्पष्ट करें। (Imp.)

उत्तर :- गुट निरपेक्षता की नीति की प्रासंगिकता।

(i) विकासशील की नीति की प्रासंगिकता
(ii) NIEO को लागू करना।
(iii) अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में अपनी पहचान तथा अस्तित्व बनाना।
(iv) अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों में विकसित देशों के वर्चस्व को चुनौती देना।
(v) गरीब देशों के आर्थिक शोषण के विरुद्ध एकजुटता।
(vi) विश्वशांति तथा निःशस्त्रीकरण लागू करना।

4. शीतयुद्ध के परिणामों का वर्णन करें।

उत्तर :- शीत युद्ध के परिणाम

(i) दो ध्रुवीय विश्व का उदय
(ii) सैन्य संधियों का गठन
(iii) गुट निरपेक्ष आंदोलन का उदय।
(iv) हथियारों की होड़ शुरू
(v). महाशक्तियों की होड़ से वैज्ञानिक एवम् तकनीकी क्षेत्र में प्रतियोगिता।
(vi) U.N.O. की कार्यकुशलता में कमी।

5. शीतयुद्ध के तनाव को कम करने में भारत ने क्या भूमिका निभाई?

उत्तर :- (i) गुट निरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व।
(ii) सैन्य गुटों में शामिल नहीं
(iii) वैश्विक समस्याओं पर स्वतंत्र विचार।
(iv) क्षेत्रीय संगठन निर्माण
(v) महाशक्तियों से मित्रतापूर्ण संबंध
(vi) अन्तर्राष्ट्रीय संगठन को मजबूत करने में सहायक।

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